बॉडी में फैट का अक्युमुलेट होना हेल्थ के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। फैट बॉडी के चाहे किसी भी भाग पर हो वो व्यक्ति को प्रभावित अवश्य करती है। फैट के डिपॉजिशन से न सिर्फ शरीर का आकार खराब हो जाता है बल्कि व्यक्ति को अनेक बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है।

Fatty Liver Problem: Causes, Symptoms, and Treatment in Hindi

आज कल की बैड life style और wrong डाइट के कारण लोगों को कई बीमारियों से जूझना पड़ता है। ऐसे ही एक डिजीज fatty liver problem आजकल लोगों में तेजी से देखने को मिल रही है। दोस्तों जैसा कि हम सभी जानते हैं कि लिवर हमारे शरीर का एक इम्पोर्टेन्ट ऑर्गन है.जो ना सिर्फ भोजन को डाइजेस्ट करने में मदद करता है बल्कि शरीर से टॉक्सिन अर्थात जहरीले और हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में भी मदद करता है। इसी के साथ लिवर एनर्जी को ग्लूकोस के रूप में स्टोर करके रखता है। यदि लिवर पर फैट का जमाव होने लगता है तो ऐसे में डाइजेशन रिलेटेड प्रॉब्लम्स और अन्य डिज़ीज़ शरीर में जन्म लेने लगती है। यही कारण है कि लिवर को सही तथा फिट रखना अत्यंत आवश्यक है।

दोस्तों फैटी लिवर लिवर से जुड़ी एक सीरियस प्रॉब्लम है जो आपके लेबर में बहुत अधिक फैट के फॉर्मेशन के कारण होती है। एक हेल्थी लिवर में थोड़ी मात्रा में फैट होता है लेकिन जब फैट आपके लिवर के वजन का 5-10 परसेंट तक पहुँच जाती है तो यह एक प्रॉब्लम बन जाती है जिसे फैटी लिवर कहा जाता है। 

इसमें लिवर का फंक्शन अफेक्टेड होता है। इस प्रॉब्लम की सबसे बड़ी वजह खानपान में गड़बड़ी और अल्कोहल का ज्यादा सेवन है। वैसे फैटी लिवर की प्रॉब्लम अल्कोहल पीने और ना पीने वालों दोनों को हो सकती है। जहाँ अल्कोहल पीने वाले को ऐल्कॉहॉलिक फैटी लिवर की प्रॉब्लम होती है, वही ना पीने वाले कोन अल्कोहोलिक फैटी लिवर अल्कोहल ना पीने वाले को फैटी लिवर की प्रॉब्लम सही डाइट ना लेने की वजह से होती है। अन्य रीज़न में वजन ज्यादा होना और type 2 डायबिटीज़ शामिल है। 

फैटी लिवर होने पर हमारी बॉडी कई तरह के संकेत देती है, जिसे पहचानना जरूरी है। सही समय पर पहचान कर इलाज और प्रिकॉशन्स लेने पर काफी हद तक इस प्रॉब्लम से छुटकारा पाया जा सकता है।

तो आइये जानते हैं इस डिजीज के Causes, Symptoms, and Treatment के बारे में।

दोस्तों फैटी लिवर दो टाइप का होता है पहला नॉन ऐल्कॉहॉलिक फैटी लिवर और दूसरा ऐल्कॉहॉलिक फैटी लिवर। 

नॉन ऐल्कॉहॉलिक फैटी लिवर डिजीज एक ऐसी बिमारी है, जो अल्कोहल पीने से नहीं होती। इसका एक्चुअल रीज़न अनियमित खानपान और लाइफस्टाइल का सही ना होना हो सकता है। अक्सर लिवर पर किसी प्रकार की सूजन आ जाती है। इस सूजन के कारण भी लिवर पर फैट का जमाव हो सकता है या एक प्रकार का साधारण फैटी लिवर का संकेत हो सकता है।

 वहीं ऐल्कॉहॉलिक फैटी लिवर एक्सेस अल्कोहल पीने से होता है। अल्कोहल पीने के कारण लिवर को काफी नुकसान पहुंचता है। अल्कोहल लिवर के लिए किसी जहर से कम नहीं है। ऐसे लोग जो अल्कोहल का सेवन करते है वो फैटी लिवर डिजीज से ग्रस्त हो सकते हैं।

अल्कोहल का सेवन करने से लिवर को अधिक कार्य करना पड़ता है जिससे लिवर की वर्किंग कपैसिटी प्रभावित हो सकती है। वैसे तो लिवर अल्कोहल को शरीर से निकाल देती हैं, लेकिन अल्कोहल से अलग किए गए हार्मफुल एलिमेंट्स तब भी शरीर में रहकर लिवर सेल्स को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। इससे ना सिर्फ सूजन की समस्या बढ़ सकती है बल्कि लिवर पर फैट का डिपोजिशन भी शुरू हो जाता है। अल्कोहल पीने के कारण लिवर पर फैट का आना कर ली लिवर डिजीज का संकेत हो सकता है। आगे चलकर ये ना सिर्फ हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी बीमारियों को जन्म दे सकता है बल्कि इससे कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।

दोस्तों फैटी लिवर डिजीज के cause  बात करें तो अनबैलेंस राइट कुछ डिसीस, एक्सेसिव अल्कोहल, वजन घटाने के लिए सप्लीमेंट का यूज़ करना और पर्याप्त नींद ना लेना शामिल है।

दोस्तों बैलेंस डाइट लेना अपने आप में एक महत्वपूर्ण चीज़ है। यदि डाइट पे न्यूट्रिअन्ट्स की कमी हो या फिर कैलोरी की मात्रा अधिक हो तो ऐसे में शरीर को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

अधिक चीजें, तली भुनी चीजें तथा जंक फूड के सेवन से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। यह फैटी लिवर को जन्म दे सकता है। वैसे जरूरी नहीं है कि फैटी लिवर सिंड्रोम सिर्फ और सिर्फ फैट के एक्सेसिव अक्यूम्यलैशन का नतीजा हो बल्कि ये डिज़ीज़ अन्य शारीरिक बीमारियों की वजह से भी जन्म ले सकती है। जैसे कि वाइरल हेपेटाइटिस, अधिक वजन तथा डायबिटीज़ की समस्या होने पर भी फैटी लिवर होने का खतरा बढ़ जाता है। 

दोस्तों अक्सर देखा गया है कि लोग अपने वेट लॉस के लिए डेली नए तरीके अपनाते हैं। इन्हीं में से एक तरीका आता है सप्लिमेंट खाना।

कई लोग अपने वजन को तेजी से हटाने के लिए ऐसे सप्लिमेंट्स या प्रोटीनयुक्त पदार्थ खाने लगते हैं, जो फैट को तेजी से जलाने के लिए बाजार में बेचे जाते हैं। ये सप्लिमेंट बॉडी की कई बीमारियों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। कई बार तो सप्लिमेंट लिवर डैमेज का कारण भी बन जाते हैं। जब लोग तेजी से वजन घटाना चाहते हैं तो ऐसे में भी सप्लीमेंट खाने के अलावा एक और काम करते हैं और वह होता है वे अपने खाना पीना छोड़ देते हैं। खाना छोड़ने से उन्हें शरीर के लिए आवश्यक न्यूट्रिअन्ट्स की मात्रा मिलना बंद हो जाती है। इससे लिवर को फंक्शन करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती यह लिवर की वर्किंग कपैसिटी को कम कर देती है जिससे लिवर फैट को ग्लूकोस के रूप में जमा करने और ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा को प्रवाहित करने में असमर्थ हो जाता है। इसका रिज़ल्ट ये होता है कि फैट लिवर पर ही अपना डिपोजिशन शुरू कर देता है।

दोस्तों अगर आपको फैटी लिवर का treatment करना है तो फैटी लिवर के सिम्पटम्स को इनिशियल स्टेज में समझना होगा। हालांकि यह मुश्किल होता है क्योंकि बहुत कम लोगों को फैटी लिवर के सिम्पटम्स के बारे में पता होता है इसलिए फिजिकल कंडीशन बहुत ज्यादा खराब होने के बाद बिमारी का पता चलता है।

फैटी लिवर डिजीज के कॉमन symptoms में पेट के दाएं भाग के ऊपरी हिस्से में दर्द, वेट लॉस, कमजोरी महसूस करना, फूड का सही प्रकार से डाइजेशन ना होना, पेट में सूजन होना और भूख का ना लगना शामिल हैं। 

इसके अलावा जो लोग फैटी लिवर की समस्या से ग्रस्त होते हैं, उनमें अक्सर कॉन्स्टिपेशन की प्रॉब्लम भी देखी जाती है। 

दोस्तों फैटी लिवर डिजीज से बचने के लिए इलाज के दौरान डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ चेंजिंग करनी चाहिए।

जैसे कि ताजे फल और सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें। अधिक फाइबर युक्त आहार का सेवन करें, जैसे की फलियां और साबुत अनाज, अधिक नमक, ट्रांसफैट, रिफाइंड, कार्बोहाइड्रेट्स तथा सफेद चीनी का प्रयोग बिल्कुल बंद कर दें। अल्कोहल का सेवन बिल्कुल ना करें। 

डाइट में लहसुन को शामिल करें या फैट जमा होने से रोकता है।

 ग्रीन टी कर सेवन करें रिसर्च के अनुसार ग्रीन टी लिवर में जमा फैट को कम करती है तथा लिवर के फंक्शन को सुधारती है। तले भुने और जंक फूड को avoid  करे। 

कुछ वेजिटेबल्स जैसे पालक, ब्रोकली, करेला, लौकी, टिंडा, तोरई, गाजर, चुकंदर, प्याज, अदरक और अंकुरित अनाज खाएं। राजमा, सफेद चना, काली दाल इन सबका सेवन बहुत कम करना चाहिए।

तथा हरी मूंग दाल और मसूर दाल का सेवन करना चाहिए। बटर चिप्स के एक पिज़्ज़ा, मिठाई, चीनी इनका उपयोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

 रेग्युलर रूप से एक्सरसाइज करें तथा सुबह टहलने जाएं और इसके साथ ही यदि आप मोटे हैं तो पहले अपना वजन घटाएं।